किसान आंदाेलन से संकट में पंजाब की इंडस्ट्री, आर्डर कैंसिल करने काे उद्यमी मजबूर

किसान आंदाेलन से संकट में पंजाब की इंडस्ट्री, आर्डर कैंसिल करने काे उद्यमी मजबूर

लुधियाना:किसान आंदोलन का असर इंडस्ट्री की प्रोडक्शन और कास्टिंग को परेशान करने लगा है। लंबे समय से चल रहे आंदोलन के चलते पंजाब के उद्योगों को बंपर आर्डरों के बावजूद कच्चे माल की उपलब्धता कम होने और इनके दामों में आए जबरदस्त उछाल से दो चार होना पड़ रहा है।

कंपनियों का दावा है कि पंजाब के उद्योगों के पिछले पांच सालों के मुकाबले इस साल कोविड के बाद जबरदस्त आर्डर प्राप्त हुए हैं। लेकिन कच्चे माल की उपलब्धता न होना और इनकी जमाखोरी के चलते इनके दामों में तेजी आ गई है। रोजाना स्टील, गत्ते और प्लास्टिक के दामों में आ रहे बदलावों से इनपुट कास्ट तय करनी मुश्किल हो रही है। इससे इंडस्ट्री को कई आर्डर भी कैंसिल करने पड़ रहे हैं।

स्टीलके दाम दस रुपये प्रति किलो बढ़े

स्टील की बात करें, तो पिछले तीन महीनों में इनके दाम दस रुपये प्रति किलो बढ़ गए हैं। वहीं प्लास्टिक भी तीस प्रतिशत तक महंगा होने के साथ साथ गत्ते के दाम 25 रुपये प्रति किलो महंगा हो गया है। इसके लिए इंडस्ट्री जमाखोरी और कंपनियों के कार्टल को मुख्य वजह मान रही है।

35 प्रतिशत कपैसिटी पर काम कर रही कंपनियां
फीको प्रधान गुरमीत सिंह कुलार के मुताबिक इस समय कंपनियां केवल 35 प्रतिशत कपैसिटी पर काम कर रही है। इसका मुख्य कारण स्टील के दाम नियंत्रित न होने से एमएसएमइ के लिए इस समय आर्डरों का भुगतान कर पाना असंभव है। ऐसे में कई कंपनियों ने डिमांड के बावजूद प्रोडक्शन को कम किया है।

आर्डर मिलने के बावजूद बढ़ी चुनौती

केके सेठ ने कहा कि इस समय इंडस्ट्री के पास आर्डर के बावजूद बड़ी चुनौती है। अगर महंगे दामों पर कच्चा माल खरीदकर उत्पादों की डिलिवरी दी जाए, तो मार्जिन से पांच प्रतिशत अधिक कास्टिंग है। ऐसे में सरकार को इसपर खास ध्यान देना होगा। रजिंदर सिंह सरहाली ने कहा कि जमाखोरी के साथ साथ कार्टल इसके लिए जिम्मेदार है। सरकार को इस पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।

सच की शक्ति

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